साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य दिया था। उस समय इसे भारत की आर्थिक क्षमता और वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना गया।
हालाँकि 2024-25 तक भारत इस लक्ष्य तक नहीं पहुँच सका और देश की GDP लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के आसपास रही।
कोविड महामारी सबसे बड़ा कारण
2020 में कोविड-19 महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन लागू हुआ। उत्पादन, व्यापार, परिवहन और सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं। इससे आर्थिक गतिविधियाँ अचानक सिकुड़ गईं और GDP वृद्धि दर नकारात्मक हो गई।
रुपये की कमजोरी
5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य डॉलर में था। जबकि भारत की अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा रुपये में संचालित होता है। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से GDP का डॉलर मूल्य अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया।
वैश्विक संकटों का प्रभाव
महामारी के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक महँगाई ने विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। भारत भी इन प्रभावों से अछूता नहीं रहा।
निजी निवेश की चुनौती
सरकारी निवेश बढ़ा, लेकिन निजी क्षेत्र की निवेश गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाई। विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियाँ भी बनी रहीं।
क्या लक्ष्य पूरी तरह विफल रहा?
नहीं। भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश का बुनियादी ढाँचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं।
इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि लक्ष्य निर्धारित समयसीमा में हासिल नहीं हुआ, लेकिन भारत की आर्थिक यात्रा लगातार आगे बढ़ती रही।

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